मंदिर के ऊपर गुंबद क्यों होता है?

मंदिर के ऊपर गुंबद क्यों होता है?

इसे सुनेंरोकेंआकाश के नीचे बैठकर जब हम प्रभु के सामने प्रार्थना करते हैं, तो उससे उपन्न तरंगे ब्रह्मांड में कही खो जाती है और वह वापस भी नहीं आती. हम जो पुकार करते हैं वह पुकार हम तक वापस लौट नहीं पाती. हमारी पुकार हम तक लौट सके, इसलिए इन धार्मिक स्थलों का आकार गुंबद की तरह निर्मित किया गया.

मंदिर के गुंबद को क्या कहते हैं?

इसे सुनेंरोकेंमंदिर का गुंबद आपकी गूंजी हुई ध्वनि को आप तक लौटा कर एक वर्तुल (सर्किल) निर्मित करवा देता हैं. उस वर्तुल का आनंद ही अद्भुत है. अगर आप खुले आकाश के नीचे जाप करेंगे, तो वर्तुल निर्मित नहीं होगा और भगवान को की गई आपकी प्रार्थना ब्रह्मांड में चली जाएगी.

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क्या घर के मंदिर में गुंबद होना चाहिए?

इसे सुनेंरोकेंशास्त्रानुसार मंदिरों में गुम्बद बनवाना या रखना शुभ नहीं माना जाता। शास्त्रानुसार पूजाघर के अन्दर रखे जाने वाले मन्दिरों में गुम्बद नहीं होना चाहिए। कहा जाता है जिन मन्दिरों में गुम्बद बनाया जाता है उनमें उस गुम्बद पर कलश व ध्वजा चढ़ाना अनिवार्य होता है। इसलिए घरों के अंदर रखें मंदिर में गुन्बद नहीं होना चाहिए।

मंदिर के शिखर की ऊंचाई कितनी होनी चाहिए?

इसे सुनेंरोकेंपूजा घर का आकार पूजा स्थल के लिए भवन का उत्तर पूर्व कोना सबसे उत्तम होता है। पूजा स्थल की भूमि उत्तर पूर्व की ओर झुकी हुई और दक्षिण-पश्चिम से ऊंची हो, आकार में चौकोर या गोल हो तो सर्वोत्तम होती है। मंदिर की ऊंचाई उसकी चौड़ाई से दोगुनी होनी चाहिए। मंदिर के परिसर का फैलाव ऊंचाई से 1/3 होना चाहिए।

मंदिर का शिखर को क्या कहते हैं?

इसे सुनेंरोकेंसंस्कृत में शिखर का शाब्दिक अर्थ ‘पर्वत की चोटी’ है किन्तु भारतीय वास्तुशास्त्र में उत्तर भारतीय मंदिरों के गर्भगृह के ऊपर पिरामिड आकार की संरचना को शिखर कहते हैं। दक्षिण भारत में इसी को ‘विमानम्’ कहते हैं।

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घर के मंदिर में कौन से भगवान की मूर्ति रखनी चाहिए?

इसे सुनेंरोकेंवास्तु के मुताबिक अगर घर में शिवलिंग की स्थापना करना चाहते हैं तो अकेला शिवलिंग नहीं बल्कि शिव परिवार की मूर्ति रखनी चाहिए. घर में हर तरह की सुख-समृद्धि और शांति के लिए शिव परिवार की मूर्ति या तस्वीर लगाना शुभ माना जाता है.

मंदिर में गर्भगृह क्या होता है?

इसे सुनेंरोकेंगर्भगृह ही मंदिर का मुख्य भाग है। यह जगती या मंड के ऊपर बना होने के कारण मंडोवर (सं. मंडोपरि) भी कहलाता है। गर्भगृह के एक ओर मंदिर का द्वार और तीन ओर भित्तियों का निर्माण होता है।

बेसर शैली के मंदिर कौन कौन से हैं?

इसे सुनेंरोकेंइस शैली के मंदिर विंध्याचल पर्वत से लेकर कृष्णा नदी तक पाए जाते हैं। बेसर शैली को चालुक्य शैली भी कहते हैं। बेसर शैली के मंदिरों का आकार आधार से शिखर तक गोलाकार (वृत्ताकार) या अर्द्ध गोलाकार होता है। बेसर शैली का उदाहरण है- वृंदावन का वैष्णव मंदिर जिसमें गोपुरम बनाया गया है।