क्षत्रिय खंगार कौन है?

क्षत्रिय खंगार कौन है?

इसे सुनेंरोकेंखंगार क्षत्रिय वंश के राजाओं ने छठवीं शताब्दी से 1472 ईसवीं तक महमूद गजनवी, अलाउद्दीन खिलजी व मुहम्मद तुगलक से युद्ध किए और सोमनाथ मंदिर की रक्षा कर जीर्णोद्धार भी कराया। ईसा 1192 में तराइन के युद्ध में ¨हदूपति पृथ्वीराज चौहान की हार के बाद गढ़ कुंडार में महाराजा खेत सिंह ने ¨हदू खंगार राज्य की नींव डाली।

खंगार राजाओं की कितनी स्पीड थी?

इनकी मृत्यु सन १२१२ ई• में हो गई थी। इनके बाद इनके पुत्र राजा नंदपाल, छत्रशाल, ख़ूबसिंह एवं मान सिंह ने जिझौतिखण्ड पर शासन किया। शासन १६५ वर्षो तक जिझौतिखण्ड पर रहा।…खेतसिंह खंगार

महाराजा खेत सिंह
उत्तरवर्ती राजा नन्दपाल
जन्म २७ दिसम्बर, ११४० जूनागढ़ गुजरात
निधन ३० अगस्त, १२१२ जिझौतिखण्ड, बुंदेलखंड
समाधि जिझौतिखण्ड

खंगार वंश की उत्पत्ति कैसे हुई?

इसे सुनेंरोकें12वीं शताब्दी में पृथ्वीराज चौहान के दोस्त और उनके खास खेतसिंह खंगार ने परमार के वंश के गढ़पति शिवा को हराकर इस किले पर कब्जा किया था और खंगार राज्य की स्थापना की थी। झांसी के गजेटियर में सन 1288 में इस राज्य के पतन की बेहद ह्दय विदारक घटना का उल्लेख है।

गढ़कुंडार के राजा कौन थे?

इसे सुनेंरोकें1531 में राजा रूद्र प्रताप देव ने गढ़ कुंडार से अपनी राजधानी ओरछा बना ली. गढ़कुंडार किले के पुनर्निर्माण और इसे नई पहचान देने का श्रेय खंगारों को है. खेत सिंह गुजरात राज्य के राजा रूढ़देव का पुत्र था. रूढ़देव और पृथ्वीराज चौहान के पिता सोमेश्वर सिंह अभिन्न मित्र हुआ करते थे.

खंगार शब्द का अर्थ क्या होता है?

इसे सुनेंरोकेंखँगार – संज्ञा पुलिंग [देश०] क्षत्रियों की एक गुजरातवासी शाखा तथा उसका राजा ।

परिहार कौन सी जाति होती है?

इसे सुनेंरोकेंजो एक क्षत्रिय कुल की गोत्र है। ये लोग मुख्यतः भारत में राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, गुजरात सहित दिल्ली, हरियाणा, पंजाब आदि राज्यों में निवास करते हैं। परिहार, प्रतिहार या पड़िहार अग्निवंशी क्षत्रिय है और सूर्यवंशी पुरुषोत्तम श्री राम के अनुज श्री लक्ष्मण जी के वंशज कहे जाते हैं।

खंगार का अर्थ क्या होता है?

इसे सुनेंरोकेंखंगार [संज्ञा पुल्लिंग] 1. तलवार चलाने में माहिर बुंदेलखंड की एक योद्धा जाति 2. खंग चलाने वाला व्यक्ति 3. जनश्रुति है कि किसी ज़माने में खंगार नामक व्यक्ति ने किसी नवविवाहित दंपति की प्राणरक्षा की थी, जिसकी वीरता के कारण बाद में यह नाम एक जाति के रूप में स्वीकार कर लिया गया।

गढ़कुंडार किसका उपन्यास है?

इसे सुनेंरोकेंउपन्यास में जितने वर्णित चरित्र इतिहास-प्रसिद्ध हैं, उनका नाम ऊपर आ गया है। मूल घटना भी एक ऐतिहासिक सत्य है, परंतु खंगारों के विनाश के कुछ कारणों में थोड़ा-सा मतभेद है। बुंदेलों का कहना है कि कुंडार का खंगार राजा हुरमतसिंह जबरदस्ती और पैशाचिक उपाय से बुंदेला-कुमारी का अपहरण युवराज नागदेव के लिए करना चाहता था।

खंगार कौन सी समाज होती है?

इसे सुनेंरोकेंजालौन। खंगार क्षत्रिय समाज का अधिवेशन गुरुवार को यहां के गेस्ट हाउस में हुआ।

गढ़कुंडार का मेला कब है?

इसे सुनेंरोकेंयह किला उस समय की बेजोड़ शिल्पकला का उदाहरण है। इस किले का निर्माण पृथ्वीराज चौहान के प्रमुख सामंत और खंगार राजवंश के संस्थापक महाराजा खेतसिंह खंगार ने बनवाया था। मप्र सरकार का संस्कृति मंत्रालय प्रतिवर्ष 27 दिसंबर को तीन दिवसीय गढ़कुंडार महोत्सव मनाया जाता है, इसमें दुनियाभर से समाज के लोग शामिल होते हैं।

परिहार ठाकुर का गोत्र क्या है?

इसे सुनेंरोकेंParihar(परिहार) rajput history. वंश- अग्निवंश। गोत्र – कश्यप । प्रवर- ३ तीन) कश्यप, बत्तसार, ध्रुव ।

परिहारों की कुलदेवी कौन है?

इसे सुनेंरोकेंमां चामुंडा देवी का जोधपुर में विशालकाय मंदिर है. इस इलाके में मां चामुंडा देवी जी को अब से करीब 550 साल पहले मंडोर के परिहारों की कुल देवी के रूप में पूजा जाता था. जोधपुर की स्थापना के साथ ही मेहरानगढ़ की पहाड़ी पर जोधपुर के किले पर इस मंदिर को स्थापित किया गया.